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सेक्स विद वर्जिन बॉय का मजा मैंने ले ही लिया अपने बेटे के दोस्त के साथ. मुझे दस दिन बाद नया लंड मिला था और वो भी एकदम कुंवारा जवान लौड़ा.
अब आगे सेक्स विद वर्जिन बॉय का मजा:
गौरव मेरी चूत चाटकर सारा रस पी गया।
अब मैं संतुष्ट थी और बहुत हल्का महसूस कर रही थी।
ऐसा आनन्द 10 दिन बाद आया था।
हम दोनों नहाकर बदन पौंछ कर बाहर आए।
मैंने अपनी वही नाइटी पहनने के लिए उठाई।
गौरव ने मेरी नाइटी छीन ली और बोला, “ऐसे ही रहिए ना। आपका बदन बहुत कातिल है। मैं आपको ऐसे ही देखना चाहता हूं।”
मैंने गौरव को कहा, “सुबह के 10:30 बज चुके हैं। अब तुझे अपनी दुकान पर जाना चाहिए। नहीं तो तेरी मम्मी भी यहां आ सकती है।”
पर गौरव का जाने का मन नहीं था।
मैंने उसको समझाया- अभी चला जा, बाद में फिर प्लान करेंगे।
मेरे समझाने पर वो अपने कपड़े पहन कर वहां से निकल गया।
मैं भी अब बिल्कुल रिलैक्स फील कर रही थी।
मैंने भी अपने कपड़े पहने और नाश्ता करके ऑफिस के लिए निकल गई।
हालांकि मैं बहुत थकी हुई थी पर मैं बहुत खुश थी, हवा में उड़ने का मन था, पानी में तैरने का मन था।
मैं ऑफिस का काम निपटाकर मॉल चली गई और जमकर शॉपिंग की।
शाम को 5 बजे घर आ गई।
अपने लिए चाय बना ही रही थी कि गौरव का कॉल आ गया।
वह पूछने लगा कि कितने बजे तक आऊं।
मेरी जरूरत अभी पूरी हो चुकी थी, अब मुझे आराम करना था।
मैंने गौरव को अभी आने को मना कर दिया।
“रात को आ जाऊँ क्या?” उसने फिर पूछा।
मैंने बोला, “मैं बहुत थकी हुई हूं थोड़ी देर आराम करूंगी। फिर तुझे कॉल करूंगी।”
इतना बोल कर मैंने कॉल कट कर दी।
चाय पीकर मैं बाहर सोफे पर ही लेट गई।
मैं इतनी थकी हुई थी कि लेटते ही मुझे नींद आ गई।
रात को 10.30 बजे मेरे पति राजीव का कॉल आया तो मेरी आंख खुली।
मैंने कॉल पर आज दिन भर की बात खुशी खुशी राजीव को बताई।
मेरी पूरी बात सुन कर राजीव बोले, “अब तो तू ठीक है न?”
मैंने भी “हां” में जवाब दिया।
राजीव बोले, “अब 5 दिन पूरा मजा ले।”
“हम्म” मैंने जवाब दिया।
राजीव बोले, “वीडियो कॉल करूं क्या?”
तो मैंने मना कर दिया।
मुझे अब सोना था।
मैं फिर से सो गई।
मेरी आंख अगली सुबह 5.30 बजे खुली।
अब मैं बिल्कुल ठीक महसूस कर रही थी।
खुश भी थी।
राजीव को गए आज नौवां दिन था।
मैं नहा धोकर पूजापाठ करके अपने नित्य कर्म निपटाकर ऑफिस के लिए निकल गई।
सारा दिन मैंने बहुत मन से अपने काम निपटा।
शाम को 6 बजे तक अपने घर भी आ गई।
गौरव के दिन में तीन कॉल आ चुके थे।
पर मैंने एक बार भी उससे बात नहीं की।
घर आकर मैंने अपने लिए चाय बनाई और गौरव को कॉल लगाया।
पहली ही घंटी पर उसने फोन उठा लिया और बोला, “आपकी तबीयत ठीक है न?”
मैंने “हां” में जवाब दिया।
“मैं आ जाऊं?” गौरव बोला।
मैंने कहा- आज रात का प्लान करेंगे, पर ऐसे मत आना। मैं तेरी मम्मी को कहूंगी, जब वो तुझे बोलेंगी तभी आना!
और फोन काट दिया।
मैंने नैना भाभी को कॉल लगाया।
उधर से भाभी की आवाज आई, “कैसी तबियत है अब?”
मैंने थोड़ी हल्की सी आवाज के बोला, “पहले से बहुत बेहतर हूं। पर अभी आराम की जरूरत है। कमजोरी महसूस हो रही है।”
“तूने कल से दवाई भी नहीं ली न?” भाभी गुस्सा करते हुए बोली।
मैंने कहा, “अकेले घर में मन नहीं लगता। कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती। इसीलिए मैं डाक्टर के पास भी नहीं गई।”
“मैं अभी 7 बजे तक गौरव को भेज देती हूं, तू उसके साथ डॉक्टर के पास चली जा दवाई ले ले, और रात को गौरव वहीं रुक जाएगा, तेरे घर ही। तुझे अकेलापन भी नहीं लगेगा।” भाभी बोली।
मैंने मुस्कुराते हुए “ओके भाभी” बोला और फोन कट कर दिया।
समय बहुत कम था।
मैं तेजी से उठी और नहाने चली गई।
नहा कर मैंने एक सेक्सी सी ब्रा पहनी और साथ में मिडी।
दरवाजा खुला रखकर मैं अपनी रसोई में खाना बनाने चली गई।
आज गौरव के लिए मैं अपने हाथ से खाना बनाना चाहती थी।
मैंने आलू गोभी की सब्जी और साथ में चपाती बनाई।
गौरव के लिए स्पेशल सूजी का हलवा भी बनाया।
7.10 पर घंटी बजी।
मैं समझ गई कि ये गौरव ही आया है।
मैंने रसोई से ही आवाज लगा कर बोला, “दरवाजा खुला है अंदर आ जा।”
गौरव ने अंदर आ कर दरवाजा बंद कर लिया।
वो मेरे पास रसोई में ही आ गया। मेरा चिकना गोरा बदन हरे रंग की मिडी में दमक रहा था।
गौरव आते ही पीछे से मुझसे चिपक गया और मेरी गर्दन पर बेतहाशा चुम्बन करने लगा।
मैंने गौरव को पीछे हटाते हुए नहा कर आने को बोला।
वो तुरन्त वॉशरूम में गया और