30 Jul 2026
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हिंदी सेक्स स्टोरीज

वो चौदह दिन- 3

हिंदी सेक्स स्टोरीज

टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी में मेरे पति मुझे वीडियो कॉल पर अपनी रंगरेलियां दिखा रहे थे. उनकी कुलीग उनके बिस्तर पर थी और साथ में एक यूरोपियन आदमी भी था.

अब आगे टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी:

करीब एक घंटा बाजार में खरीदारी करने के बाद गौरव ने मुझे घर छोड़ दिया और नमस्ते करके अपने घर के लिए चला गया।

अब करीब 9:00 बज चुके थे मैंने एक बार और चांस लेने की सोची और डिनर जोमैटो से मंगवाना तय किया।
क्या पता आज कोई अच्छा सा आदमी मिल जाए.
क्योंकि जोमैटो के अलावा मुझे कोई दूसरा सही ऑप्शन दिखाई नहीं दे रहा था।

खाना ऑर्डर करते ही मैं तुरंत अपने कमरे में गई और जाकर कल वाली वही सेक्सी नाइटी पहन ली.
इस बार मैंने नाइटी के अंदर भी कुछ नहीं पहना था।

9:15 बजे ही मेरे पास जोमैटो के डिलीवरी बॉय का कॉल आ गया।
मैंने खिड़की से झांक कर देखा तो सामने बाइक पर एक लगभग 50 वर्षीय व्यक्ति था जो देखने में ठीक-ठाक लग रहा था.

वैसे भी मेरा इंटरेस्ट ऐसे पुरुषों में ज्यादा था जिनके साथ में मैं सुरक्षित महसूस कर सकूं।
कम उम्र के लोगों से तो मैं दूर ही रहना चाहती थी।

आज शायद मेरी मुराद पूरी होने वाली थी।

मैंने दरवाजा खोला और उस आदमी को घर के अंदर बुला लिया.
उसने मुझे मेरा पैकेट पकड़ा और पेमेंट के पैसे मांगे।

मैं चाहती थी कि वह मेरा बदन चारों तरफ से देखे।
इसलिए मैं पैकेट लेकर पलट कर अंदर की तरफ गई और उसको बोला- पैसे लेकर आती हूं।

मैं थोड़ा गाँड मटका मटका कर चल रही थी ताकि उसकी नजर मेरे पूरे बदन पर पड़े।
अपने कमरे में जाकर मैं वहां पैकेट रखा और नकद पैसे निकाले जैसे ही वापस आई तो देखा कि वो आदमी तो मेरे घर के बाहर खड़ा था मैंने उसको पैसे पकड़ने के बहाने अंदर बुलाने की भी कोशिश की.

पर वो तो शायद जरूर से ज्यादा ही शरीफ था।
अब मैं भी सिर्फ इशारा ही तो दे सकती थी उसको जबरदस्ती चोदने को थोड़ा बोल दूंगी।

मुझे एक बार फिर अपनी कोशिश नाकामयाब होती दिख रही थी।

तब तक वह बंदा मेरे से पैसे लेकर अपनी बाइक स्टार्ट करके वहां से जा चुका था और मैं एक बार फिर खाली हाथ खड़ी थी।

मेरा मूड बहुत खराब था; मैंने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में आते ही अपनी नाईटी भी उतार दी ड्रेसिंग के सामने खड़े होकर गौर से अपना पूरा बदन देखने लगी।
क्या मेरे बदन में अब वह पहले जैसा चुंबकत्व नहीं रहा?
सब मुझसे भाग क्यों रहे हैं?

दिखने में तो मैं काफी कामुक लग रही थी मेरे 36 साइज के गोरे रंग के मोटे-मोटे चुचे मुझे ही लालच दे रहे थे।
मेरा गोरे रंग का सपाट पेट मुझे आकर्षित कर रहा था।

फिर यह सब मुझसे भाग क्यों रहे हैं? कोई भी मुझे लाइन नहीं मार रहा।
अरे एक बार कोई कोशिश करके तो देखा मैं तो “हां” करने को तैयार हूँ।

अभी यह सब सोच ही रही थी कि मेरे पति राजीव का कॉल आ गया.
“क्या हाल है जानू?” राजीव ने पूछा।
मैंने जवाब दिया, “किसी तरह तुम्हारे बिना दूसरा दिन तो कट गया अब बाकी 12 दिन क्या होगा? मुझे भी नहीं पता तुम जल्दी आओ मुझे तुम्हारे बिना रहने की आदत नहीं है और ये तुम्हारी गलती है कि तुमने अपनी लत मुझे लगा दी। अब मेरा मन नहीं लग रहा तो बताओ मैं क्या करूं?”
राजीव ने पलट कर जवाब दिया, “तुझे मेरी नहीं इस समय एक पुरुष शरीर की जरूरत है फिर चाहे वो कोई भी हो, और मैं तो तुझको बोला है कि जो तुझे ठीक लगे अपना इंतजाम कर ले।”

मैंने झल्लाते हुए कहा, “क्या सड़क पर टांगें खोल कर बैठ जाऊं? जब कोई नहीं मिल रहा तो मैं क्या करूं? हर किसी पर भरोसा तो नहीं कर सकती।”

राजीव ने जब मुझे गुस्से में देखा तो बात को बदलने के लिए एकदम बोला, “अच्छा बताओ आज सुबह से अब तक क्या किया?”
मैंने भी विषय को बदलने के लिए राजीव को अपनी सुबह से शाम तक की सारी दिनचर्या बताने शुरू कर दी।

मेरी बातें सुनकर राजीव हंसने लगे, बोले, “दूध वाला, सब्जी वाला, जोमैटो वाला कोई भी नहीं फंसा पाई।”
मैंने कहा, “बात फँसाने की नहीं है। बात हिम्मत करने की है। जब तुम साथ होते हो तो पता नहीं हिम्मत कहां से आ जाती है। अकेले बहुत डर लगता है। और फिर पता नहीं कौन कहां किस तरह फायदा उठा ले। ये भी सोचना पड़ता है।”

फिर राजीव ने पूछा, “बाजार से क्या-क्या लाई?”
तो मैंने वह भी विस्तार से बताया।

तभी राजीव ने मुझसे कहा, “अरे शशि!”
“हम्म” मैं रुक गई।

“तुम यार गौरव को ट्राई करो, अच्छा लड़का है, और घर की बात घर में भी रहेगी।” राजीव ने मुझे सलाह दी।
“छी…छी… कुछ तो शर्म करो। गौरव अभी 19 साल का है और हमारे बेटे का दोस्त है हमारे लिए तो बेटे की तरह ही है