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ओपन रिलेशनशिप स्टोरी में मेरे पति की गैरमौजूदगी में मुझे सेक्स की जरूरत महसूस हुई तो मैंने अपने पति से कहा. उन्होंने किसी भी मर्द को घर बुलाकर चुदाई कर लेने की राय दी.
अब आगे ओपन रिलेशनशिप स्टोरी:
रात को मुझे नींद बहुत अच्छी आई।
मुझे राजीव की कमी एक बार भी महसूस नहीं हुई।
सुबह मेरी आंख अपने समय पर खुली।
मैं नहा धोकर तैयार हुई और अपनी एक्टिवा उठाकर ऑफिस के लिए निकल गई.
मेरे ऑफिस में काम इतना होता है कि सारा दिन कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता।
शाम को 6:00 बजे जब मैं ऑफिस से घर के लिए निकली तो देखा कि बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी।
मैंने अपनी एक्टिवा को ऑफिस के अंदर ही लगाया और गौरव को गाड़ी लेकर मेरे ऑफिस के पास आने को कहा.
गौरव मेरे बेटे चेतन का बचपन का मित्र है।
जब से मेरा बेटा नोएडा इंजीनियरिंग कॉलेज में गया है। तब से गौरव ही मेरे घर के छोटे-बड़े कामों में मेरा हाथ बंटाता है।
गौरव यहां अपने पिताजी के साथ उनकी दुकान पर बैठता है।
उसका घर भी मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है।
वो अपने बड़ों की तरह हमारा सम्मान भी करता है।
तो छोटे-छोटे कामों के लिए मैं अक्सर गौरव को ही बुलाती हूं।
मेरी एक कॉल पर ही गौरव तुरंत अपनी गाड़ी उठा कर सामने आ गया।
मैं ऑफिस से निकलकर सीधे गौरव की गाड़ी में बैठी और घर आ गई।
गौरव मुझे छोड़कर अपने घर चला गया।
घर आकर मैंने सबसे पहले अपने कपड़े बदले और अपने नित्य कर्म तेजी से निपटाने लगी।
दिन तो धीरे-धीरे बीत गया, पर जैसे ही रात के 8:00 बजने लगे, मुझे राजीव की जरूरत महसूस होने लगी।
आखिर पिछले 20 साल से हम दोनों एक दूसरे के साथ थे।
एक दूसरे के बिना रहना थोड़ा तो मुश्किल था ही।
मैंने राजीव को एक कॉल की।
उन्होने कॉल काट दी और मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज किया- बिजी हूं. 2 घंटे बाद मिलते हैं।
डिनर करके अंतर्वासना की कहानी पढ़ते पढ़ते मैंने रात को 10 बजे तक इंतजार किया।
10 बजते ही मैंने फिर राजीव को व्हाट्सएप पर मैसेज किया, तब राजीव का कॉल आया।
हम दोनों ने एक दूसरे से बात की और अपनी अपनी दिनचर्या बताई।
राजीव ने मुझसे पूछा, “रात को नींद कैसी आई?”
तो जवाब में मैंने कहा, “मुझे तो अच्छी नींद आई। आप अपना बताइए?”
राजीव ने हंसते हुए कहा, “यार! रात को सोने का मन ही नहीं था, पर फ्लाइट की थकान और आज के काम की वजह से नींद लेनी जरूरी थी। इसलिए हम लोग सो गए थे।”
मैंने राजीव से अपना दर्द बिना किसी झिझक के बयां किया।
मैंने कहा, “तुम तो वहां गुलछर्रे उड़ा रहे हो, पर यार, मेरे लिए बड़ी समस्या है। मुझे तुम्हारे बिना रहने की आदत नहीं है। दिन तो किसी तरह कट गया पर जैसे-जैसे रात आई, मुझे फिर से तुम्हारी कमी महसूस होने लगी।”
राजीव ने कहा, “कोई बात नहीं डार्लिंग, बस 13 दिन और! फिर भी अगर ऐसी समस्या है तो तू भी अपने लिए कोई इंतजाम कर ले जिसको मन हो बुला ले।”
मैंने कहा, “अरे यार! सबको मालूम है तुम यहां नहीं हो। अगर ऐसे में कोई भी पुरुष घर में आएगा तो आसपास वालों को शक पैदा होगा। वो ठीक नहीं है। इसीलिए ऐसे किसी अनजान को बुलाना ठीक नहीं। तुम तो दूसरे शहर में हो इसीलिए वहां क्या कर रहे हो किसी को पता नहीं है, पर यहां अपने शहर में बहुत सोच समझकर चलना पड़ता है।“
“हम्म” राजीव ने जवाब दिया।
कुछ सेकंड सोचकर राजीव ने कहा, “एक तरीका है।”
मैंने पूछा, “क्या?”
तो राजीव ने कहा, “जोमैटो से खाने के लिए कुछ ऑर्डर करो. कभी-कभी जोमैटो पर बहुत अच्छे लड़के आते हैं। अगर कोई तुम्हारी पसंद का लड़का मिल जाए तो उसको अंदर खींच लेना, कोई शक भी नहीं करेगा और तुम्हारा काम भी हो जाएगा।“
मुझे राजीव का ये आइडिया अच्छा लगा।
इससे मेरे बदन की कामाग्नि भी शांत हो जाएगी और बाहर किसी को पता कि नहीं चलेगा।
मैंने तुरंत अपने लिए जोमैटो से कुछ सामान ऑर्डर किया।
सिर्फ 10 मिनट में ही मेरे पास जोमैटो की डिलीवरी बॉय का कॉल आ गया.
मैंने खिड़की खोलकर देखा सामने एक लगभग 35 वर्षीय व्यक्ति खड़ा था जो देखने में काफी आकर्षक था।
मैं बहुत खुश हो गई।
मुझे लगा कि ईश्वर ने मेरी सुन ली।
मैंने उस व्यक्ति को अपने गेट पर आने को कहा और बहुत तेजी से कपड़े चेंज करके एक सेक्सी सी नाइटी पहनकर अपने दरवाजे पर पहुंची।
वो व्यक्ति मेरे दरवाजे पर आ चुका था।
मैंने जैसे ही दरवाजा खोला, वो भी मुझे अवाक से देखता रह गया।
शायद उसने मेरे इस कातिल स्वरूप की उम्मीद नहीं की थी।
मेरी टांगों के बीच के हिस्से में उसको देखकर हल्की-हल्की हलचल होने लगी.
और सबसे बड़ा