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अब आगे द लंड स्टोरी:
मैंने फिर से अपने पति को फोन लगाया और गौरव का सारा गुस्सा उन पर झाड़ दिया।
वे पूछने लगे, “अरे हुआ क्या?”
तो मैंने बताया, “आपसे बात करते-करते डेढ़ घंटा बीत गया. और इसी बीच जब मैं बाहर पहुंची तो गौरव ऊपर जाकर चेतन के कमरे में सो चुका था।”
मेरी बात सुनकर 1 मिनट तो मेरे पति चुप रहे, फिर बोले, “कोई बात नहीं, आज जितना हो गया, उतना आज के लिए बहुत है। कल फिर से कोशिश करो। धीरे-धीरे तुम्हें तुम्हारा टारगेट मिल जाएगा।
फिर वे मुझसे बोले- वीडियो कॉल करोगी क्या?
मैंने झल्ला कर कहा, “बिल्कुल नहीं करूंगी, आपको जो करना है कीजिए। मैं अपने कमरे में सोने जा रही हूं।”
और मैं अपने कमरे में आ गई.
काफी देर तक सोने की कोशिश करती रही पर नींद तो मुझे कोसों दूर थी।
मैं अपने बिस्तर पर इधर से उधर करवटें बदल रही थी.
रात को 1:00 तक तो मैं जागती रही, उसके बाद मुझे याद नहीं कब नींद आ गई।
आदत के हिसाब से सुबह 6:00 बजे मेरी आंख खुली अब मेरा मूड थोड़ा फ्रेश था।
मैंने सोचा एक बार फिर ऊपर जाकर गौरव को देखती हूं.
मैंने वॉशरूम में जाकर अपना मुंह धोया हल्का-फुल्का मेकअप किया।
अपने बाल सही किए और तौलिया हल्का सा गीला करके उससे अपना पूरा बदन भी साफ कर लिया।
फिर कल रात वाली नाइटी पहन कर मैं ऊपर गौरव के कमरे में गई।
गौरव अभी भी बेसुध सो रहा था।
गौरव का कंबल बिस्तर से नीचे पड़ा था मैंने देखा गौरव सिर्फ अंडरवियर बनियान पहन कर सो रहा था।
नींद में भी गौरव का लिंग पूरा तना हुआ था।
ऐसे लग रहा था जैसे अभी ऊपर छत की तरफ फायरिंग कर देगा।
मैंने पहली बार इतने करीब से गौरव के लिंग को इतना तना हुआ देखा।
मेरे मुंह में पानी आ गया एक बार को तो मन हुआ कि जाकर पकड़ लेती हूं. जो होगा देखा जाएगा.
पर मेरे अंदर शायद इतनी हिम्मत ही नहीं थी।
मैं वहीं बैठकर सोचने लगी कि अब क्या किया जाए।
काफी देर विचार करने के बाद एक बात तो मेरी समझ में आ गई कि शायद गौरव अपनी तरफ से पहल नहीं करेगा।
पहल तो मुझे ही करनी पड़ेगी.
आज मेरे पति को गए हुए आठवां दिन था।
अभी 6 दिन और बाकी थे, मेरे पास काफी समय था।
मैंने निर्णय किया कि अब जो भी करूंगी बहुत सोच समझकर करूंगी और अपनी तरफ से ही पहल करूंगी।
अब मैं गौरव की तरफ से कोई उम्मीद नहीं करूंगी।
मन ही मन पूरी प्लानिंग करके मैंने गौरव का कंबल उठाया और गौरव को उसे औढ़ा दिया।
गौरव इतनी गहरी नींद में था कि उसे कुछ आभास ही नहीं था।
मैं चुपचाप दबे पांव गौरव के बिस्तर पर चढ़ी और उसी कंबल में गौरव की तरफ पीठ करके आंख बंद करके लेट गई।
अब मुझे गौरव के जागने का इंतजार करना था।
करीब 7:30 गौरव ने अचानक मेरी तरफ करवट ली और उसकी एक टांग मेरे चूतड़ से टकराई।
पर मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि मुझे तो सोने का ही नाटक करना था।
जैसे ही गौरव की एक टांग मुझसे टकराई, गौरव एक झटके से उठ गया।
“आंटी!” गौरव ने मुझे पुकारा.
पर मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
“आंटी!” गौरव ने दोबारा थोड़ी ऊंची आवाज में पुकारा।
पर मैंने फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
मेरी बाजू पकड़ कर ‘आंटी आंटी!’ बोलकर गौरव ने एक बार फिर से मुझे जगाने का प्रयास किया पर मैं तो जैसे बहुत गहरी नींद में थी।
दो-तीन बार कोशिश करने के बाद गौरव फिर से वही मेरे पीछे लेट गया और कंबल ओढ़ लिया।
पर कभी भी गौरव और मेरे बीच में काफी दूरी थी।
मैं उसके अगले एक्शन का इंतजार कर रही थी।
करीब 5 मिनट जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मुझे लगा कि इंतजार करना बेकार है, उठ जाना ही बेहतर है।
तभी अचानक मैंने महसूस किया कि गौरव धीरे-धीरे सरक कर मेरी तरफ आने की कोशिश कर रहा है।
मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी।

The Lund Story
गौरव धीरे-धीरे आगे सरक कर मेरी पीठ से चिपक गया अब गौरव का लिंग मुझे अपने चूतड़ पर चुभता महसूस हो रहा था।
गौरव की अगली हरकत से तो मैं हतप्रभ ही हो गई।
करीब 1 मिनट इंतजार करने के बाद जब उसने मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी तो उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपना लिंग मेरे दोनों चूतड़ के बीच की दरार में सेट कर दिया और उसके बाद वह फिर उसी स्थिति में शांत पड़ा रहा।
हाय रे… आज 8 दिन बाद मेरे बदन से कोई लौड़ा टकराया था।
पर मुझे अपनी खुशी कंट्रोल करनी थी और सोते रहने का ही नाटक करना था।
मुझे पता था कि अगर मैं जाग गई तो गौरव तुरंत पीछे हट जाएगा।
इस अवस्था में एक-दो मिनट रुकने के बाद अब गौरव ने धीरे-धीरे अपना लिंग मेरे चू