30 Jul 2026
Trending News
Desi Adult Stories
हिंदी सेक्स स्टोरीज

वो चौदह दिन- 5

हिंदी सेक्स स्टोरीज

हॉट बॉय मसाज़ स्टोरी में मेरी तबियत खराब हुई तो मेरे बेटे का दोस्त मेरी तीमारदारी करने लगा. वह मेरे जिस्म को ललचाई नजर से देख रहा था. उसका लंड खड़ा हो गया था.

अब आगे हॉट बॉय मसाज़ स्टोरी:

नैना भाभी के जाने के बाद मैं दवाई लेकर फिर से सो गई।

दोपहर को करीब 2 बजे मेरे घर की घंटी बजी।
मैंने उठकर खिड़की से बाहर देखा तो बाहर गौरव खड़ा था।
वो शायद मेरे लिए लंच लाया था।

मैंने दरवाजा खोला.
मुझे “आंटी नमस्ते” बोलकर गौरव अंदर आ गया।
वो मेरे लिए खाना लाया था।

टिफिन वहीं रखकर वो किचन में गया, बर्तन लाकर उसने मेरे लिए वहीं खाना लगा दिया।
मैंने गौरव को बोला, “अभी खाना खाने का मन नहीं है। मेरे सिर में बहुत दर्द है। मेरा बदन टूट रहा है। तू सब यहीं रख दे। मैं खाना बाद में खा लूंगी।”
गौरव ने कहा, “आंटी मम्मी ने बोला है कि शशि आंटी का ख्याल रखना है, और उनको खाना अपने सामने खिला कर आना है। अगर आपके सर में दर्द है तो मैं आपका सर दबा देता हूं।”

इतना कहकर गौरव मेरे बराबर में आकर खड़ा हो गया और मेरा सर दबाने लगा।
मैं सोचने लगी कि अब गौरव को यहां से कैसे भगाया जाए।

मैंने उसको हटाते हुए कहा, “चल मैं खाना खा लेती हूं।”
मैं खाना खाने बैठ गई।

अभी मैंने आधी रोटी ही खाई थी कि अचानक मुझे उल्टी आ गई.
जो खाया था वो सब भी निकल गया, साथ ही सारा फर्श भी खराब हो गया।

मेरी हालत देखकर गौरव तुरंत मेरे लिए पानी लेकर आया।
मैंने गौरव के हाथ से पानी लिया और उठकर वॉश बेसिन में कुल्ला करने जाने लगी.
पर मेरे शरीर में इतनी भी जान नहीं थी कि मैं खुद से उठकर वॉश बेसिन तक जा सकूं।

गौरव ने मुझे पकड़ कर उठाया और मेरी बगल से मुझे पकड़ कर धीरे-धीरे वाश बेसिन तक ले गया।
वाश बेसिन पर जाकर मैंने कुल्ला किया और वहीं पास रखी कुर्सी पर ही बैठ गई।

तब तक गौरव ने पोछा लगाकर उल्टी वाली पूरी जगह साफ कर दी।
मैंने गौरव को कहा, “मेरी अलमारी में से मेरे कपड़े ला दे तो मैं अपने कपड़े भी बदल लूं।”
क्योंकि मेरे कपड़ों पर भी उलटी गिर चुकी थी।

गौरव तुरंत उठकर मेरे कमरे में गया और मुझे अलमारी खुलने की आवाज आई.
दो-तीन मिनट बीतने के बाद भी गौरव मेरे कपड़े लेकर बाहर नहीं आया तो मैं खुद ही अपने कपड़े लेने जाना उचित समझा।

मैं जैसे ही अपने कमरे के दरवाजे पर पहुंचे तो मैंने देखा गौरव अभी तक मेरी एक अलमारी में कपड़े टटोल रहा था।

मैंने गौरव को पूछा’ “क्या हुआ? मेरे कपड़े नहीं मिले।”
गौरव बोला, “आंटी कपड़े तो बहुत सारे हैं पर मुझे यह नहीं पता कि आप अब क्या पहनोगी।”
मैंने सामने पड़ी नाइटी की तरफ इशारा करते हुए कहा, “फिलहाल तो कहीं जाना नहीं है, यही दे दे, यही पहन लूंगी।”
गौरव ने नाइटी उठाकर मुझे दे दी।

मैंने गौरव को बाहर जाने को कहा।
मैंने कमरे का दरवाजा हल्के से लगाया और अपने कपड़े उतार कर नाइटी पहन ली।

नाइटी पहनकर मैं बाहर आ गई.
मेरे बाहर आते ही गौरव फिर मेरे कमरे में गया और मेरे उतरे हुए कपड़ों को ले जाकर वॉशिंग मशीन में रख आया।

पहली बार मैंने महसूस किया की गौरव मेरे कपड़ों में बहुत इंटरेस्ट ले रहा है।
मैंने गौरव को अपने पास बुलाया।
“जी आंटी!” बोलकर गौरव मेरे पास आया।

जैसे ही गौरव मेरे सामने आकर खड़ा हुआ, मैंने महसूस किया की गौरव की पैन्ट के उसे हिस्से में तनाव था।
पहली बार गौरव मुझे कोई ब.च्चा ना लग कर एक मर्द लग रहा था।
यह हो सकता है शायद यह मेरी गलतफहमी थी।

पर मैंने गौरव को आजमाने का निर्णय किया।
मैंने गौरव को कहा, “मेरे सिर में बहुत दर्द है। पूरा बदन दर्द कर रहा है। क्या तू मेरा बदन दबा देगा?”
उसने कहा, “हां जी आंटी, आप लेट जाओ।”

मैं वहीं सोफे पर औंधे मुंह लेट गई।
मैंने जानबूझकर अपना मुंह गौरव की तरफ नहीं किया।

गौरव पीछे से मेरी टांगें दबाने लगा।
इस तरह टांगें दबाने से मुझे बहुत आराम मिल रहा था बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।
मेरी पिंडलियों में होने वाला दर्द भी कम होने लगा था।

पिंडलियां दबाते दबाते अचानक गौरव के हाथ ऊपर मेरी जांघों तक पहुंच गए और अब वह मेरी जांघों को हल्के-हल्के दबा रहा था.
या यूं कहूं कि वह मेरी जांघों को सहला रहा था।

गौरव के इस तरह मेरी जांघों को सहलाने से मुझे शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से बहुत आराम महसूस हो रहा था.
पर मैं अभी भी समझ नहीं पा रही थी कि मुझे क्या करना चाहिए?

मैंने गौरव को कहा, “मेरी पीठ में भी बहुत दर्द है।”
गौरव ने कहा, “हां जी आंटी, मैं दबाता हूं।”

और वो मेरी जांघें सहलाने के बाद