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न्यूड बॉडी X कहानी में मैं अपने गाँव गया तो बड़ी चाची से मुलाक़ात हुई. वे मेरी देखभाल के लिए मेरे घर में ही रुक गयी. रात की बारिश में हम दोनों भीग गए तो …
हैलो, कैसे हो सब? आप सबके मेरी पिछली सेक्स कहानी
ट्रेन में मदद से चुदाई तक का सफर
के लिए लगातार मैसेज आ रहे हैं.
अच्छा लगा आप सबके मैसेज पढ़कर.
जो भी आपकी मांग है, सब पूरी होगी, पर थोड़ा टाइम तो दो न यार!
देवियो, आप सबका इतना प्यार देखकर बहुत अच्छा लगा, इसके लिए धन्यवाद और भाई लोग, तुम लोगों की कुछ मांगें पूरी कर चुका हूँ अब और कुछ संभव नहीं है.
ये न्यूड बॉडी X कहानी कुछ दिनों पहले होली के बाद की है.
मैं अपने गांव गया था कुछ काम से, अकेले ही बाइक लेकर.
सुबह निकला तो दोपहर तक पहुंच गया.
गांव का घर मेरा बहुत बड़ा है, पर वहां कोई रहता नहीं है.
मेरे बड़े दादाजी के घर पर मेरे घर की चाबी रहती है.
वहीं के लोग मेरे घर की साफ सफाई और अन्य दूसरी चीजों का ध्यान रखते हैं.
मेरे बड़े दादा के दो बेटे हैं. वे दोनों चाचा मुंबई में जॉब करते हैं. पर उनकी पत्नियां यानि कि मेरी दोनों चाचियां यहीं गांव में रहती हैं. बड़े चाचा का कोई बच्चा नहीं है और छोटे वाले के दो बेटे और एक बेटी है.
मैं गांव दोपहर में पहुंच गया, तो चाबी लेने बड़े दादा के घर गया.
वहां पर सिर्फ उनके बच्चे थे घर में.
मैंने पूछा तो बच्चों ने बताया कि दोनों मेरी चाचियां खेत में गई थीं.
तो मैंने चाबी ली और अपना घर आ गया.
बड़े दादा अपने संगी साथियों के साथ तीरथ करने गए हुए थे.
मैं अपने घर को खोल कर अन्दर गया तो सब सफाई की हुई थी.
चूंकि चाची को मेरे आने की खबर थी तो उन्होंने मेरे वाले घर को और भी सही से व्यवस्थित करवा दिया था.
मैं अपने कमरे में गया और लेट गया.
मुझे गांव में 15 दिन रहना था क्योंकि खेत का कुछ काम करवाना था.
मैं बहुत सालों बाद गांव गया था.
मुझे अपने बचपन की सभी बातें याद आने लगीं.
पहले मैंने अपना पूरा घर घूमा.
फिर सुसु लगी थी मुझे, तो बाथरूम जा ही रहा था कि याद आया कि पहले तो मैं घर के पीछे जाकर सुसु करता था.
सोचा कि चलो आज भी वहीं जाकर करता हूँ.
मैं पीछे के गेट से गया और जहां बचपन में सुसु करता था, वह मेरे और बड़े दादा के घर के बीच का हिस्सा था.
सबको पता होगा कि गांव में घरों के पीछे भी कमरे होते थे और अमूमन सभी के यहां एक हैंडपंप लगा रहता था.
वह कमरा कभी किसी मेहमान के लिए आराम करने के लिए हुआ करता था और सभी की जरूरत के लिए पानी का हैंडपंप लगा था.
मेरे घर के पीछे मेरा खेत भी था, उधर पर अब सभी के खेतों की मेड़ बना दी गई थी.
उधर ही एक छोटी-सी जगह थी, जहां मैं सुसु करता था. मैं वहां गया और सुसु करने के लिए बैठने लगा.
तभी अचानक दूसरी तरफ से खेत से एक औरत अचानक मेरे एकदम सामने आ गई.
मैंने डर से सुसु रोक दिया, पर वह औरत मेरे लंड को देख रही थी और मुझे देख रही थी.
फिर वह बोली- ये क्या कर रहा है यहां? ये कोई जगह है पेशाब करने की? ये रास्ता है और तू ययां सुसु कर रहा है!
मैंने लंड अन्दर करते हुए कहा- मुझे नहीं पता था. मैं बचपन में यहीं सुसु करता था, तो मुझे लगा आज भी वैसा ही है.
यह कह मैंने उनको सॉरी बोला.
तो वह औरत हंसने लगी.
मैं पीछे को हुआ तो वह मेरी तरफ आई और पूछने लगी- तू विराट है ना?
मैंने हां बोला और पूछा- आप कौन हो?
तो वह बोली- मुझे नहीं पहचान रहा? मैं तेरी बड़ी चाची हूँ … भूल गया इतनी जल्दी?
मैंने कहा- अरे हां चाची, कैसी हो आप?
उनको लेकर मेरे मन में सम्मान का भाव आ गया था.
वे जवाब देती हुई बोलीं- ठीक हूँ तू कैसा है? और कब आया? और कौन-कौन आया है?
मैंने कहा- बस अभी आ ही रहा हूँ और अकेले आया हूँ. खेत में काम था. आप लोग ही तो बुलाए थे.
वे बोलीं- हां, अरे तुम्हारे दोनों चाचा तो हैं नहीं और तेरे दादा भी नहीं हैं … वे तीरथ करने गए हैं … तो एक आदमी की जरूरत थी ही. चल, आ गया तू. अब सब हो जाएगा. पहले घर चल … कुछ खाया तूने?
मैंने कहा- नहीं.
तो वे बोलीं- चल, खाना बना रखा है. मुझे भी भूख लगी है, साथ में खाते हैं.
फिर वे आगे चलने लगीं और मैं पीछे.
चाची पसीने में भीगी हुई थीं.
उनके बदन से पसीने की महक आ रही थी.
उनकी गांड बहुत बड़ी थी. उनका नाम शोभा था और फिगर मुझे लगता है कि 36-34-38 के जैसा ही कुछ था.
बहुत बड़े स्तन थे उनके … और ढीले नहीं होते गांव की औरतों के … क्योंकि खेत में काम करती रहती हैं.
घर गए तो चाची हाथ-मुँह धोकर खाना ले आईं.
फिर हम दोनों बैठकर खाने लगे.
मैंने पूछा- छोटी चाची कहां हैं?
तो उन्होंने बोला- वह खेत में ह