30 Jul 2026
Trending News
Desi Adult Stories
हिंदी सेक्स स्टोरीज

गर्म मंगेतर की बुर चुदाई का मजा

हिंदी सेक्स स्टोरीज

रोमांस लव सेक्स कहानी में मेरा रिश्ता पापा ने अपने दोस्त की बेटी से कर दिया. एक दिन उसने मुझे मिलने बुलाया. वह बहुत हॉट गर्ल थी. उसने मुझे गले लगने को कहा.

फ्रेंड्स, मेरा नाम पंकज है और मैं बिलासपुर का रहने वाला हूँ.
अभी मेरी उम्र 38 साल है.

यह रोमांस लव सेक्स कहानी तब की है, जब मैं 21 साल का था.

उस वक्त मैं कॉलेज में स्नातक के सेकंड ईयर में पढ़ाई कर रहा था.
उसी वक्त मेरे पिताजी ने अपने दोस्त की लड़की से मेरी इंगेजमेंट करवा दी.
पिता जी का सख्त अनुशासन था तो मैं उनसे कुछ कह ही नहीं पाया.

पिता जी और उनके दोस्त का बिजनेस साथ में चलता था तो उन दोनों ने अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने का निर्णय लेते हुए मेरी शादी पक्की कर दी थी.

मैं उस लड़की को पहले एक-दो बार देख चुका था.
उसका नाम प्रभा था, वह 18 साल की थी.

प्रभा देखने में बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी थी … वैसा ही रूप-रंग, वैसा ही फिगर.

हमारी सगाई पूरे परिवार की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान से हुई.
उस वक्त तो मैं प्रभा से कुछ बात कर ही नहीं पाया और न ही उससे उसका फोन नंबर वगैरह ले सका.

इसी वजह से सगाई के 3 महीने गुजर चुके थे पर हमारी अब तक आपस में कोई खास बात या मुलाकात नहीं हो पाई थी.

कुछ दिनों बाद मेरे नंबर पर एक अनजान नंबर से कॉल आया.

मैं- हैलो, कौन?
सामने से आवाज़ आई- मैं हूँ प्रभा.

मेरी खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा.

उसने फिर कहा- हैलो … मैं प्रभा …
मैं- हां प्रभा, बोलो … तुम्हें मेरा नंबर कहां से मिला?

प्रभा ने हंस कर कहा- बस मिल गया, जिसके साथ पूरा जीवन बिताना है, उसका नंबर खोजना कौन-सी बड़ी बात है.
मैं- हां … बोलो, कैसी हो तुम? क्या काम था?

प्रभा- क्या हुआ? कुछ काम रहेगा तभी कॉल कर सकती हूँ क्या?
मैं- नहीं-नहीं … बस ऐसे ही पूछ लिया.

प्रभा- क्या हम कहीं मिल सकते हैं क्या?
मैं- हां, क्यों नहीं … तुम बताओ, कब मिलना है?

प्रभा- दीदी और जीजाजी पास में घूमने जाने वाले हैं … क्या हम भी चलें?
मैं- हां, क्यों नहीं … कब चलना है?

प्रभा- नेक्स्ट संडे!
मैं- ओके … मैं रेडी रहूँगा.

संडे की सुबह 8 बजे प्रभा का कॉल आया- मैं दीदी और जीजाजी के साथ बाइक पर आ रही हूँ, तुम मुझे रतनपुर वाले डैम के रास्ते पर मिलो … फिर हम साथ में चलेंगे.

नौ बजे करीब प्रभा, अपनी दीदी और जीजाजी के साथ डैम वाले रास्ते पर पहुंच गई.
मैं भी बाइक पर था तो प्रभा मेरे साथ आकर बैठ गई.

दीदी और जीजाजी आगे-आगे चलने लगे और कुछ दूरी पर हम थे.

प्रभा मुझसे कुछ दूर होकर बैठी थी तो मैंने एक जोर से ब्रेक लगाए.
वह मुझसे चिपक सी गई.

पहली बार कोई लड़की मेरे साथ इस तरह से बैठी थी.
उसका पूरा ऊपरी शरीर मेरी पीठ से चिपका हुआ था.

हम रास्ते भर यहां-वहां की बात करते हुए आखिरकार डैम पर आ पहुंचे.
डैम के पास एक बहुत अच्छा सा गार्डन था, जहां अक्सर कपल आया करते थे.

दीदी और जीजाजी की भी अभी शादी नहीं हुई थी, तो हम दोनों उन्हें अकेला छोड़ दूसरी तरफ एक बेंच पर बैठ गए.

पहले तो हम दोनों को समझ नहीं आया कि क्या बात करें.
फिर धीरे-धीरे हम पढ़ाई की, जॉब की और इधर-उधर की बात कर रहे थे.

तभी प्रभा ने पूछा- मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ?
मैं- तुम बहुत प्यारी हो … बहुत खूबसूरत हो मैं तुम्हें हमेशा अपने सीने से लगाकर रखूँगा.
प्रभा ने हंस कर कहा- तो फिर लगाते क्यों नहीं हो?

मैं उसकी बात सुनकर झेंप गया कि ये लड़की होकर भी कितनी बिंदास होकर बात कर रही है और मैं चूतिया सा उसके साथ कुछ कर ही नहीं पा रहा हूँ.

मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ कर खींचा और अपने सीने से लगा लिया.

हम दोनों की गर्म सांसें आपस में टकरा रही थीं.

धीरे-धीरे हमारे होंठ आपस में मिल गए.
ये हमारा पहला किस था, जो बहुत देर तक चला.

हम वहां करीब 2 घंटे रुके और बस किस करते रहे … कभी बूब्स पर हाथ लगाना, कभी उसका मेरे लंड पर हाथ फेरना यह अब भी हमारी पहली मुलाकात में हुआ और इसके आगे कुछ होने की गुंजाइश भी नहीं थी.
और शायद मैं उस वक्त उसके साथ ऐसा करने में डर भी रहा था.

वापसी में वह मुझसे रास्ते भर चिपक कर बैठी रही.
शाम में 4 बजे मैंने उसे छोड़कर घर वापस आ गया.

रात को करीब 11 बजे उसका कॉल आया.
मैं- हैलो!

प्रभा- कैसे हो?
मैं- बस तुम्हें ही याद कर रहा था.

प्रभा- मैं भी तुम्हें बहुत मिस कर रही हूँ.
मैं- क्या हम दोनों फिर से मिल सकते हैं?

प्रभा- हां, पर कहां?
मैं- कहीं पर भी … पर एकदम अकेले में, जहां कोई आता-जाता न हो.

प्रभा- ऐसी जगह कहां है?
मैं- किसी दोस्त के रूम पर मिलें क्या?

प्रभा- नहीं &he