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वाइल्ड Xxx कहानी में मेरे ऑफिस के सारे आदमी मेरी जवानी पर नजर रखते थे. होली वाले दिन ऑफिस में पार्टी थी. सब आये थे. सबने होली खेली मेरे जिस्म के साथ.
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, मैं आपकी प्यारी पारुल आज आपको बताने जा रही हूँ कि कैसे मेरे ऑफिस की टीम के 5 लड़कों ने मुझे होली पर चोदा और मेरी चूत को फाड़ दिया.
यह वाइल्ड Xxx कहानी होली के दिन की ही है.
उस दिन मेरे ऑफिस में पार्टी रखी गई थी.
मेरे ऑफिस में तीन लड़के काम करते थे … आदित्य, विकास और अमन. इन तीनों से मेरी ठीक-ठाक बातचीत होती थी.
उनके अलावा मेरी टीम में 2 और लड़के भी थे … आदिल और मोहसिन.
ये शक्ल से ही मादरचोद लगते थे और हमेशा ही मुझे चोदने की फिराक में रहते थे.
उनकी गंदी नजर मैं अच्छे से पहचानती थी.
इसलिए मैं उनकी खूब क्लास लगाकर रखती थी ताकि वे दोनों अपनी औकात में रहें.
मैं एक बेहद खूबसूरत लड़की हूँ.
मेरा बदन गोरा है. मेरी गांड का उभार एकदम कातिलाना है … जिसे मेरे बॉयफ्रेंड अजय ने मेरी गांड मार मार कर एकदम गोल और सेक्सी बना दिया है.
मेरी चूत दूध जैसी गोरी और चिकनी है.
चूंकि मेरा बॉयफ्रेंड अपने 8 इंच के लंड से रोज मेरी चूत और गांड की गहराई कई कई घंटे तक नापता है, इस वजह से मैं पूरी चुदक्कड़ हो चुकी हूँ.
अब मुझे अपनी चुत में बड़े से बड़ा लंड लेने में जरा भी दिक्कत नहीं होती है.
मेरा बॉयफ्रेंड भी मेरे अलावा और भी कई लड़कियों को चोदता रहता है क्योंकि वह चुदाई में उस्ताद है और उसका लंड तो समझो बोरिंग करने की मशीन है.
हम दोनों चुदाई में एकदम खुले हैं … कोई रोक-टोक नहीं.
हमारे बीच बस एक शर्त है कि किसी की भी चूत चोदो, गांड मारो या मरवाओ, लेकिन किसी और से दिल मत लगाओ.
मतलब यह कि चुदाई चाहे मैं किसी से करूं या वह किसी को भी चोदे … बस हमारी मुहब्बत में फर्क नहीं आना चाहिए.
तो होली के दिन मैंने ऑफिस में खूब होली खेली.
ऑफिस के सारे मर्दों-लड़कों ने मुझे जमकर रंग लगाया.
मुझे रंग के बहाने लड़कों ने अपना लंड मेरी गांड पर चिपकाया.
मेरी चूचियों की गोलाई को कई हाथों ने हल्के हाथों से नापा और सहलाया.
इतने सारे मर्दों के स्पर्श से मैं गर्म हो गई थी और मेरी चुत लंड लंड करने लगी थी.
होली खेलकर मैं ऑफिस की छत पर थोड़ी देर के लिए सिगरेट पीने चली गई.
छत पर कोई आता-जाता नहीं था … पूरी सुनसान रहती थी.
वहां एक स्टोर रूम था, जिसमें कबाड़ पड़ा रहता था.
मैं सिगरेट एंजॉय कर रही थी, तभी ये तीनों (आदित्य, विकास और अमन) छत पर आ गए.
आदित्य बोला- हैप्पी होली पारुल!
उन्हें देखते ही समझ में आ गया था कि रंग लगाने के बहाने साले मेरे अंग छूने आए हैं … अभी अकेले में रंग लगाने आए हैं, बाद में मौका मिला तो मुझे चोद भी देंगे.
बाद में पता चला कि एक ने छत से नीचे जाने का दरवाजा भी लॉक भी कर दिया था.
मैं उनकी टीम लीडर थी.
जब तीनों ने मुझे ‘हैप्पी होली’ बोला, मैंने भी उन्हें बोला.
मैंने सिगरेट बुझाते हुए कहा- यार, ज्यादा रंग मत लगाना, बहुत रंग लग चुका है!
आदित्य बोला- ऐसे कैसे? अभी तो आपके कई जगह रंग नहीं लगा!
यह कह कर वह मेरी चूचियों को ललचाई नजरों से देखने लगा.
तभी अमन ने पीछे से आकर मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए.
वह मुझे पीछे ले गया और अपने हाथों के घेरे में मुझे जकड़ लिया.
उसने मेरे पेट पर दोनों हाथ रखकर सहलाना शुरू किया और खुद से मेरी गांड को चिपका लिया.
मैं हाथ पीछे की हुई थी तो मेरे दोनों हाथ उसके लंड पर दब रहे थे और हिलने-डुलने के कारण मेरी गांड भी उसके लंड पर लग रही थी.
अब मेरे बूब्स उभर कर आगे को आ गए थे और विकास मेरे ठीक सामने था.
उसने मेरे गालों को सहलाते हुए रंग लगाना शुरू कर दिया.
वह बहुत हल्के हाथों से मेरे कोमल गालों को छू-छूकर रंग लगाने में लगा था.
अब आदित्य भी पास आ गया.
उसने मेरी गर्दन के नीचे और बूब्स के ऊपर मसल-मसल कर रंग लगाया और कान में कुछ अलग से अंदाज में बोला- हैप्पी होली, पारुल जी!
उधर मेरे हाथ अमन के लंड का कड़ापन महसूस करने लगे थे.
अमन मेरे पेट पर हाथ फेर रहा था और अपना लंड मेरी हथेली पर दबा रहा था.
मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी.
पहले से ही मैं गर्म थी और अब इनकी बेशर्मी ने मेरी चूत में तो आग ही लगा दी थी.
मैंने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा- बस बहुत हो गया … अब जाने दो, मुझे छोड़ो यार तुम लोग!
ये सुनते ही आदित्य मेरे बिल्कुल आगे आ गया.
उसने अपना लंड मेरी चूत पर चिपका कर दोनों हाथों से मेरे चेहरे पर रंग लगाना शुरू कर दिया.
मैं अमन और आदित्य के बीच में सैंडविच बन गई थी.
एक का लंड मेरी चूत प